अयोध्या: विश्व हिंदू परिषद यात्री निवास में 22 से 24 सितंबर तक आयोजित हनुमंत ग्रंथ कथा का समापन हनुमान जन्मोत्सव के साथ हुआ। तीन दिनों तक चले इस आयोजन में श्री श्यामसुंदर ‘श्यामा’ ने व्यास पीठ से भगवान हनुमान के चरित्र, भक्ति, सेवा, शक्ति और प्रभु श्रीराम के प्रति उनके पूर्ण समर्पण से जुड़े प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन किया।
कथा के दौरान श्रद्धालुओं ने हनुमान जी के जीवन और उनके आदर्शों से जुड़े प्रसंगों को सुना। आयोजन के अंतिम दिन हनुमान जन्मोत्सव के अवसर पर पूरा वातावरण भक्तिमय रहा और श्रद्धालुओं ने जय श्रीराम तथा जय बजरंगबली के जयघोष किए।
हनुमान चालीसा की दो चौपाइयों पर हुआ विस्तार से वर्णन
कथा की खास बात यह रही कि तीन दिनों के सीमित समय में हनुमान चालीसा की केवल पहली दो चौपाइयों पर ही विस्तार से चर्चा हो सकी। श्री श्यामसुंदर ‘श्यामा’ ने इन चौपाइयों के शब्दों, भाव, आध्यात्मिक संकेतों और जीवनोपयोगी संदेशों को विस्तार से समझाया।
उन्होंने कहा कि हनुमान चालीसा की प्रत्येक चौपाई अपने आप में ज्ञान, भक्ति और साधना का विशाल संसार समेटे हुए है। उनके अनुसार, यदि पूरी हनुमान चालीसा के प्रत्येक पद का इसी तरह विस्तार से वर्णन किया जाए तो इसके लिए 45 दिन का समय भी कम पड़ सकता है।
कथा सुनने पहुंचे अयोध्या के विद्वान
आयोजन में अयोध्या के अनेक प्रतिष्ठित विद्वान पंडित और कथा-वाचक भी कथा श्रवण के लिए पहुंचे। उनकी मौजूदगी से कार्यक्रम की गरिमा और बढ़ी। तीन दिनों तक चली कथा के दौरान श्रद्धालुओं ने धार्मिक प्रसंगों का श्रवण किया और हनुमान भक्ति में हिस्सा लिया।
हनुमान जन्मोत्सव के साथ कथा के समापन पर आयोजन स्थल पर श्रद्धा और भक्ति का माहौल रहा। श्रद्धालुओं के लिए यह तीन दिवसीय हनुमंत कथा एक आध्यात्मिक अनुभव के रूप में रही।
